Time with we grows !!

Beautifully Written….

“ 7 pani puris for 1 rupee” and
“1 pani puri for 7 rupees”,
we grew up!!

Somewhere between
“Ground mai aaja” and
“Online aaja”,
we grew up!!

Somewhere between
“stealing eclairs of your sis” and “Bringing Silk for her”,
we grew up!!

Somewhere between
“Just five more mins Mom” and “Pressing the snooze button”,
we grew up!!

Somewhere between
“Crying out loud just to get what we want” and
“Holding our tears when we are broken inside”,
we grew up!!

Somewhere between
“I want to grow up” and
“I want to be a child again”,
we grew up!!

Somewhere between
“Lets meet and plan” and
“Lets plan and meet”,
we grew up!

And as we grew up, we realized how, silently but surely ,our lives have changed…!!”😊😊😊

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2 thoughts on “Time with we grows !!

  1. वो दोस्त अब थकने लगे है…

    किसीका पेट निकल आया है,
    किसीके बाल पकने लगे है…

    सब पर भारी ज़िम्मेदारी है,
    सबको छोटी मोटी कोई बीमारी है…

    दिनभर जो भागते दौड़ते थे,
    वो अब चलते चलते भी रुकने लगे है…

    पर ये हकीकत है,
    सब दोस्त थकने लगे है…

    किसी को लोन की फ़िक्र है,
    कहीं हेल्थ टेस्ट का ज़िक्र है…

    फुर्सत की सब को कमी है,
    आँखों में अजीब सी नमीं है..

    कल जो प्यार के ख़त लिखते थे,
    आज बीमे के फार्म भरने में लगे है…

    पर ये हकीकत है
    सब दोस्त थकने लगे है…

    देख कर पुरानी तस्वीरें,
    आज जी भर आता है…

    क्या अजीब शै है ये वक़्त भी,
    किस तरहा ये गुज़र जाता है…

    कल का जवान दोस्त मेरा,
    आज अधेड़ नज़र आता है…

    ख़्वाब सजाते थे जो कभी ,
    आज गुज़रे दिनों में खोने लगे है…

    पर ये हकीकत है
    सब दोस्त थकने लगे है…

  2. “हर उस बेटे को समर्पित जो घर से दूर है”
    *बेटे भी घर छोड़ जाते हैं😔
    😔
    जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
    आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…
    खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…
    अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
    अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…
    बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
    😔
    घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
    सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
    पैसे कमाने की जरूरत में…वो घर से अजनबी बन जाते हैं
    लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।
    😑
    बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,
    माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है।
    कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।
    लड़के भी घर छोड़ जाते है।
    😑
    मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,
    जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,,,
    माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं
    तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है😥
    लड़के भी घर छोड़ जाते हैं

    नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
    छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
    सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
    मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,
    बेटियाँ ही नही साहब, बेटे घर छोड़ जाते हैं😥

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